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विलयन की परिभाषा (Solution), विलयनो के विभिन्न प्रकार, विलयन के गुणधर्म

विलयन (Solution)

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विलयन विलयन,समांगी मिश्रणो में सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है जिसमें 0.1- 2 nm व्यास की परास के कण पाये  जाते हैं, सामान्यतः यह परास आयन या छोटे अणुओ का आकार है | ये पारदर्शी है, यद्यपि ये रंगीन हो सकते हैं तथा इन्हें स्थिर रखने पर ये पृथक नहीं होते हैं |


विलयन का वर्गीकरण -

सामान्यतः विलयन ठोस का द्रव में घुलना ही माना जाता है या द्रवों का मिश्रण माना जाता है | परंतु इनके अलावा भी कई प्रकार के विलयन होते हैं वास्तव में द्रव्य की कोई भी अवस्था विलयन बनाने में समर्थ होती हैं | द्वितीय विलयनों के लिये, अल्प घटक को विलेय माना जाता है तथा मुख्य घटक को प्राय: विलायक माना जाता है | 


विलयनो के विभिन्न प्रकार -

 

विलयन के       प्रकार  

      विलयनों के विभिन्न प्रकार 

   गैसीय      विलयन 

 गैस में गैस   

 गैस में द्रव  


गैस में ठोस 


ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन गैसो का मिश्रण

 क्लोरोफॉर्म वाष्प का नाइट्रोजन गैस के साथ मिश्रण 

नाइट्रोजन गैस में कपूर की वाष्प 

     द्रव          विलयन 

 द्रव में गैस 

 द्रव में द्रव 

 द्रव में ठोस 

 पानी में विलेय ऑक्सीजन

 पानी में विलेय इथेनॉल 

पानी में विलेय सुक्रोस 

    ठोस        विलयन 

ठोस में गैस  

ठोस में द्रव

ठोस में ठोस 

 पैलेडियम में हाइड्रोजन का विलयन 

सोडियम के साथ मर्करी का अमलगम 

सोने में घुली कॉपर, मिश्र धातु  





सांद्रता की इकाइयां -

    पद         (Term) 

     सूत्र  (Formula)

             प्रकृति (Nature)

1. मोलरता       (M)

विलयन में मोलो की संख्या /विलयन का आयतन (लीटर में) 

              ताप पर निर्भर 

2.नॉर्मलता       (N)

 विलयन में तुल्यांको की संख्या/विलयन का आयतन (लीटर में) 

              ताप पर निर्भर 

3.मोल भिन्न (X ) 

 अवयव के मोल /कुल मोल 

                ताप स्वतंत्र 

4.मोललता      (m) 

 विलयन के मोलो की संख्या /विलायक का द्रव्यमान (kg )

                ताप स्वतंत्र 

5.द्रव्यमान        % 

 अवयव का द्रव्यमान /विलयन का कुल द्रव्यमान x 100 

                ताप स्वतंत्र 

 


गैसों का द्रव मे विलयन -

एक गैस की द्रव में विलेयता हेनरी के नियम से समझाई जा सकती हैं जिसके अनुसार एक द्रव में एक गैस की विलेयता गैस के दाब के समानुपाती होती हैं | 


एक विलयन में गैस की मोल भिन्न गैस के आंशिक दाब के अनुपाती हैं या विलयन में गैस का आंशिक दाब =KH X  विलयन में गैस की मोल भिन्न | यहां KH हेनरी के नियम का स्थिरांक है | गैस की विलेयता प्राय: ताप बढ़ने से घटती हैं तथा दाब में वृद्धि के साथ बढ़ती हैं | इसी कारण जलीय प्रजातियां ठंडे पानी में गर्म पानी की तुलना में अधिक आराम से रहती हैं (तापीय प्रदूषण) 

ठोसों का द्रवों में तथा द्रवों का द्रवो में विलयन - 

वाष्पदाब -  दिये गये ताप पर द्रव के साथ साम्यावस्था में वाष्प का दाब, वाष्पदाब कहलाता है | द्रव का वाष्प दाब किए गए ताप पर लाक्षणिक मान है तथा ताप के साथ बढ़ता है | 

राउल्ट का नियम -  

इस नियम के अनुसार, स्थिर ताप पर विलयन के किसी भी वाष्पशील घटक का आंशिक दाब, शुद्ध घटक के वाष्प दाब तथा विलयन मे उसी घटक की मोल भिन्न  के गुणनफल के बराबर होता है | 

1.) वाष्पशील विलेय युक्त विलयन -

माना एक मिश्रण (विलयन) द्रव A के nA  मोल तथा द्रव B के nB  मोल को मिलाकर बनाया गया है | माना दो घटकों A तथा B का विलयन में आंशिक दाब PA तथा PB है तथा PA 0 तथा PB 0 क्रमश: शुद्ध अवस्था में वाष्प दाब है |        


इस प्रकार, राउल्ट के नियम के अनुसार,


P = PA + PB = (n/ nA + nB) X PA0 + (nB / nA + nB) x PB0 = XAPA0 + XBPB0



2.) अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन -


यदि विलेय अवाष्पशील है तो कुल दाब केवल विलायक के कारण होगा | इस प्रकार -



i.e.,                 P = P solvent
                  
                       P solvent = विलायक का आंशिक दाब     ;    P = P solvent 0  X solvent